एवं बुद्धेः परं बुद्ध्वा संस्तभ्यात्मानमात्मना ।
जहि शत्रुं महाबाहो कामरूपं दुरासदम् ॥ 3.43 ॥
हे महाबाहो अर्जुन! इस प्रकार बुद्धि से भी परे (आत्मा) को जानकर और बुद्धि के द्वारा मन को वश में करके, तुम इस 'काम' रूपी दुर्जय (जिसे जीतना कठिन है) शत्रु को मार डालो।
विस्तार: यह 'कर्मयोग' की अंतिम विजय घोषणा है। स्वयं को पहचानें, अपनी आंतरिक शक्ति को जगाएं और उन इच्छाओं को खत्म करें जो आपके लक्ष्य के बीच आती हैं।