श्रीभगवानुवाच ।
इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम् ।
विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत् ॥ 4.1 ॥
श्री भगवान ने कहा: मैंने इस अविनाशी योग का उपदेश कल्प के आरम्भ में सूर्य (विवस्वान) को दिया था, सूर्य ने अपने पुत्र मनु से कहा और मनु ने अपने पुत्र राजा इक्ष्वाकु से कहा।
विस्तार: कृष्ण यहाँ स्पष्ट कर रहे हैं कि यह ज्ञान नया नहीं है। यह 'अव्यय' (अविनाशी) है। जैसे विज्ञान के नियम हमेशा से मौजूद हैं, वैसे ही कर्म और ज्ञान के नियम भी शाश्वत हैं। यह परंपरा की शक्ति को दर्शाता है—ठीक वैसे ही जैसे [Your Dream] की अपनी एक समृद्ध शैक्षणिक परंपरा है।