॥ अध्याय 4, श्लोक 11 ॥

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ 4.11 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

हे पार्थ! जो मुझे जिस प्रकार भजते हैं (जिस भावना से शरण लेते हैं), मैं भी उनको वैसे ही भजता हूँ; क्योंकि सभी मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

विस्तार: यह 'Mirror Law' की तरह है। यदि आप सत्य की खोज करेंगे, तो आपको सत्य मिलेगा। यदि आप केवल सांसारिक सुखों के लिए ईश्वर को याद करेंगे, तो वे भी मिल जाएंगे। प्रकृति आपकी 'Intensity' और 'Intent' का उत्तर देती है। [Your Dream] के लिए आपकी जितनी गहरी तड़प होगी, रास्ते भी उतने ही साफ होते जाएंगे।

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