यस्य सर्वे समारम्भाः कामसङ्कल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पण्डितं बुधाः ॥ 4.19 ॥
जिसके सम्पूर्ण कार्य इच्छा और फल के संकल्प से रहित हैं, ऐसे उस व्यक्ति को, जिसके कर्म ज्ञान रूपी अग्नि द्वारा भस्म हो गए हैं, ज्ञानी लोग 'पण्डित' कहते हैं।
विस्तार: जब आप पढ़ाई इसलिए करते हैं क्योंकि वह आपका धर्म है, न कि केवल 'रिजल्ट' के दबाव में, तो वह पढ़ाई बोझ नहीं बनती। ज्ञान आपकी चिंताओं (कर्मों के बंधन) को जला देता है।