एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः ।
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥ 4.2 ॥
हे परन्तप अर्जुन! इस प्रकार परंपरा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों (राजा और ऋषियों) ने जाना, किन्तु बहुत काल बीत जाने के कारण वह योग इस पृथ्वी लोक में लुप्तप्राय हो गया।
विस्तार: समय के साथ शुद्ध ज्ञान में 'मिलावट' आ जाती है या लोग उसे भूल जाते हैं। कृष्ण यहाँ 'Quality Control' की बात कर रहे हैं। जब ज्ञान गलत हाथों में जाता है या स्वार्थ के लिए इस्तेमाल होता है, तो वह अपनी शक्ति खो देता है। इसीलिए इसे पुनः जीवित करना आवश्यक है।