अपाने जुह्वति प्राणं प्राणेऽपानं तथापरे ।
प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः ॥ 4.29 ॥
दूसरे कितने ही योगीजन अपान वायु में प्राण वायु को हवन करते हैं और वैसे ही अन्य योगीजन प्राण वायु में अपान वायु को हवन करते हैं तथा कितने ही प्राण और अपान की गति को रोककर प्राणायाम के परायण रहते हैं।
विस्तार: यहाँ कृष्ण श्वास (Breathing) के विज्ञान की बात कर रहे हैं। प्राणायाम केवल कसरत नहीं है, बल्कि मन को स्थिर करने की तकनीक है। एक थका हुआ छात्र यदि केवल 5 मिनट प्राणायाम करे, तो उसकी मानसिक ऊर्जा फिर से बढ़ सकती है।