॥ अध्याय 4, श्लोक 30 ॥

अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति ।
सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः ॥ 4.30 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

दूसरे कितने ही संयमित आहार (Niyata-ahara) करने वाले पुरुष प्राणों को प्राणों में ही हवन करते हैं। ये सभी यज्ञों को जानने वाले पुरुष यज्ञों द्वारा पापों का नाश कर चुके हैं।

विस्तार: यहाँ कृष्ण 'आहार' (Diet) के महत्व पर जोर दे रहे हैं। सही भोजन आपके मस्तिष्क की क्षमता बढ़ाता है। ये सभी साधक जो अनुशासन का पालन करते हैं, वे अपने मानसिक तनाव और पापों (अशुद्धियों) को धो डालते हैं।

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