॥ अध्याय 4, श्लोक 34 ॥

तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥ 4.34 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

उस ज्ञान को तू गुरु के पास जाकर समझ। उन्हें दंडवत प्रणाम करने से (विनम्रता), उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर प्रश्न करने से वे तत्वदर्शी ज्ञानी तुझे ज्ञान का उपदेश करेंगे।

विस्तार: यह एक छात्र के लिए सबसे बड़ी सीख है। ज्ञान केवल गूगल से नहीं मिलता, उसके लिए सही एटीट्यूड चाहिए:
1. प्रणिपात (Humility): विनम्रता, यह मानना कि मुझे सीखना है।
2. परिप्रश्न (Inquiry): तर्कसंगत सवाल पूछना।
3. सेवा (Service/Dedication): सिखाने वाले के प्रति सम्मान और लगन।

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