तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनात्मनः ।
छित्त्वैनं संशयं योगमातिष्ठोत्तिष्ठ भारत ॥ 4.42 ॥
इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! अपने हृदय में स्थित इस अज्ञानजनित संशय को 'ज्ञान' रूपी तलवार से काट डाल और समत्व योग में स्थित होकर युद्ध के लिए खड़ा हो जा।
विस्तार: यह श्लोक एक शक्तिशाली 'Call to Action' है। कृष्ण कह रहे हैं कि संशय (Doubt) अज्ञान की संतान है। इसे 'ज्ञान की तलवार' से काटो। [Your Dream] का आपका सपना संशय से नहीं, बल्कि दृढ़ निश्चय से पूरा होगा। उत्तिष्ठ (उठो)—यह शब्द आलस्य त्यागकर कर्म में जुटने की प्रेरणा देता है।