श्रीभगवानुवाच ।
बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन ।
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥ 4.5 ॥
श्री भगवान ने कहा: हे परन्तप अर्जुन! मेरे और तुम्हारे बहुत से जन्म बीत चुके हैं। उन सबको मैं जानता हूँ, किन्तु तुम उन्हें नहीं जानते।
विस्तार: कृष्ण यहाँ आत्मा की अमरता और अपने 'ईश्वरत्व' को प्रकट कर रहे हैं। वे समझा रहे हैं कि डेटा (यादें) हमारे पास सीमित हैं, लेकिन सत्य असीमित है।