॥ अध्याय 5, श्लोक 14 ॥

न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः ।
न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥ 5.14 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

परमात्मा मनुष्यों के न तो कर्तापन की, न कर्मों की और न कर्मफल के संयोग की ही रचना करते हैं; बल्कि यह सब 'स्वभाव' (प्रकृति) के द्वारा ही हो रहा है।

विस्तार: कृष्ण एक बहुत बड़ी बात कह रहे हैं—भगवान हमें मजबूर नहीं करते। हमारे गुण, हमारे संस्कार और हमारी मेहनत ही हमारे भविष्य का निर्माण करते हैं। [Your Dream] की ओर आपका हर कदम आपकी अपनी मेहनत और स्वभाव का परिणाम है।

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