॥ अध्याय 5, श्लोक 15 ॥

नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः ।
अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः ॥ 5.15 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

परमात्मा न किसी के पाप को और न किसी के पुण्य को ही ग्रहण करता है। 'अज्ञान' के द्वारा ज्ञान ढका हुआ है, उसी से सब जीव मोहित हो रहे हैं।

विस्तार: अक्सर हम अपनी असफलताओं के लिए भाग्य या भगवान को दोष देते हैं। कृष्ण कहते हैं कि ज्ञान तो हमारे भीतर ही है, बस वह 'अज्ञान' (भ्रम, आलस्य, डर) की परतों से ढका हुआ है। इन परतों को हटाते ही आपको [Your Dream] का रास्ता साफ दिखने लगेगा।

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