इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः ।
निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः ॥ 5.19 ॥
जिनका मन समत्व भाव में स्थित है, उनके द्वारा इस जीवित अवस्था में ही संपूर्ण संसार जीत लिया गया है; क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम है, इसलिए वे ब्रह्म में ही स्थित हैं।
विस्तार: यदि आपका मन कठिन परिस्थितियों में भी शांत और 'समान' (Balanced) रहता है, तो आपने दुनिया जीत ली है। [Your Dream] के मार्ग में जब सब कुछ आपके खिलाफ हो, तब भी स्थिर रहना ही आपकी असली सफलता है।