॥ अध्याय 5, श्लोक 21 ॥

बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् ।
स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ॥ 5.21 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

बाहर के विषयों में आसक्ति रहित अंतःकरण वाला पुरुष आत्मा में स्थित जिस सुख को प्राप्त होता है, वह ब्रह्मरूप योग में एकाकीभाव से स्थित पुरुष अक्षय (कभी न खत्म होने वाले) आनंद का अनुभव करता है।

विस्तार: जब आप सोशल मीडिया या बाहरी मनोरंजन (Temporary Spikes) से मन हटाकर अपनी पढ़ाई और [Your Dream] की गहराई में डूबते हैं, तो आपको एक 'Flow State' का अनुभव होता है। यही वह आनंद है जो आपको थकावट से बचाता है।

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