॥ अध्याय 5, श्लोक 25 ॥

लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥ 5.25 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

जिनके पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके संशय ज्ञान द्वारा मिट चुके हैं, जो संपूर्ण प्राणियों के हित में लगे हुए हैं और जिनका मन वश में है, वे ब्रह्मवेत्ता पुरुष शांत ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।

विस्तार: महान लक्ष्य केवल निजी स्वार्थ के लिए नहीं होते। जब आप [Your Dream] को समाज की भलाई से जोड़ देते हैं (जैसे: मैं एक महान इंजीनियर बनकर देश की सेवा करूँगा), तो आपकी इच्छाशक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

वापस जाएँ
अध्याय 5, श्लोक 25 की व्याख्या
॥ अध्याय 5, श्लोक 25 ॥

लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥ 5.25 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

जिनके पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके संशय ज्ञान द्वारा मिट चुके हैं, जो संपूर्ण प्राणियों के हित में लगे हुए हैं और जिनका मन वश में है, वे ब्रह्मवेत्ता पुरुष शांत ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।

विस्तार: महान लक्ष्य केवल निजी स्वार्थ के लिए नहीं होते। जब आप [Your Dream] को समाज की भलाई से जोड़ देते हैं (जैसे: मैं एक महान इंजीनियर बनकर देश की सेवा करूँगा), तो आपकी इच्छाशक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

वापस जाएँ