॥ अध्याय 5, श्लोक 6 ॥

संन्यासस्तु महाबाहो दुःखमाप्तुमयोगतः ।
योगयुक्तो मुनिर्ब्रह्म नचिरेणाधिगच्छति ॥ 5.6 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

परंतु हे महाबाहो! कर्मयोग के बिना संन्यास (मन को वश में करना) प्राप्त होना कठिन है और कर्मयोग से युक्त मुनि शीघ्र ही ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है।

विस्तार: कृष्ण कह रहे हैं कि काम से भागना हल नहीं है। यदि आप [Your Dream] के लिए मेहनत नहीं करेंगे और केवल ध्यान लगाने की कोशिश करेंगे, तो मन भटकता रहेगा। कर्मयोग (मेहनत) मन को शुद्ध करने का सबसे तेज़ रास्ता है।

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