नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः ।
न चातिस्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन ॥ 6.16 ॥
हे अर्जुन! यह योग न तो बहुत खाने वाले का सिद्ध होता है, न बिल्कुल न खाने वाले का; न बहुत सोने वाले का और न सदा जागने वाले का ही सिद्ध होता है।
विस्तार: सफलता के लिए न तो भूखा रहकर शरीर को कष्ट देना है, न ही आलस्य में पड़ना है। न तो रात-रात भर जागना सही है (बिना संतुलन के), और न ही दिन भर सोना। [Your Dream] के लिए एक बैलेंस्ड रूटीन अनिवार्य है।