॥ अध्याय 6, श्लोक 24 ॥

सङ्कल्पप्रभवान्कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः ।
मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥ 6.24 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

संकल्प से उत्पन्न होने वाली समस्त कामनाओं को पूर्णतः त्यागकर और मन के द्वारा इंद्रियों के समुदाय को सभी ओर से भलीभाँति रोककर (अभ्यास करना चाहिए)।

विस्तार: हमारी अधिकांश इच्छाएं हमारे मन की कल्पनाओं (संकल्प) से जन्म लेती हैं। काश मेरे पास वो होता, काश मैं वहाँ घूमता। इन ख्याली पुलावों को बंद करके अपनी इंद्रियों को वश में करना ही सफलता का आधार है।

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