शनैः शनैरुपरमेद्बुद्ध्या धृतिगृहीतया ।
आत्मसंस्थं मनः कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत् ॥ 6.25 ॥
धैर्ययुक्त बुद्धि के द्वारा धीरे-धीरे (शनैः शनैः) संसार से उपराम हो जाए और मन को आत्मा में स्थिर करके फिर और कुछ भी चिंतन न करे।
विस्तार: एकाग्रता एक दिन में नहीं आती। कृष्ण कहते हैं 'धीरे-धीरे' अभ्यास करें। यदि आप IIT-Bombay के कठिन सवालों को हल कर रहे हैं, तो धैर्य रखें। बुद्धि को स्थिर करना एक मैराथन है, स्प्रिंट नहीं।