यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम् ।
ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत् ॥ 6.26 ॥
यह चंचल और अस्थिर मन जहाँ-जहाँ भी (विषयों में) भटककर जाए, वहाँ-वहाँ से इसे रोककर बार-बार आत्मा के वश में ही लाना चाहिए।
[Image: A person gently bringing a wandering puppy back to its path]विस्तार: यह पढ़ाई के लिए सबसे बेहतरीन सलाह है। जब भी मन मोबाइल या ख्यालों में भटके, खुद को दोष न दें। बस धीरे से उसे वापस किताब पर ले आएं। यह 'वापस लाने' की प्रक्रिया ही मन की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।