॥ अध्याय 6, श्लोक 34 ॥

चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्द्ढम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥ 6.34 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

हे कृष्ण! यह मन बड़ा ही चंचल, प्रमथन (मथ डालने वाला), बलवान और दृढ़ है। इसे रोकना मैं वायु को रोकने के समान अत्यंत कठिन मानता हूँ।

विस्तार: अर्जुन मन की चार विशेषताएं बताते हैं: चंचल (Unsteady), प्रमाथि (Turbulent), बलवान (Powerful), और दृढ़ (Obstinate)। यह वर्णन किसी भी सोशल मीडिया एडिक्टेड मन के लिए बिल्कुल सही बैठता है। क्या हवा को मुट्ठी में बंद किया जा सकता है? अर्जुन को मन भी ऐसा ही लग रहा है।

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