असंयतात्मना योगो दुष्प्राप इति मे मतिः ।
वश्यात्मना तु यतता शक्योऽवाप्तुमुपायतः ॥ 6.36 ॥
जिसका मन वश में नहीं है, उसके द्वारा योग प्राप्त करना कठिन है—ऐसा मेरा मत है। परंतु वश में किए हुए मन वाले प्रयत्नशील पुरुष के द्वारा सही उपायों से इसे प्राप्त करना संभव है।
विस्तार: बिना 'Self-Control' के कोई भी बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकती। कृष्ण स्पष्ट कर रहे हैं कि केवल इच्छा करने से कुछ नहीं होगा, सही उपायों (Correct Strategies) और मेहनत की जरूरत है।