॥ अध्याय 6, श्लोक 45 ॥

प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः ।
अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ॥ 6.45 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

परंतु प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करने वाला योगी, पापों से शुद्ध होकर, अनेक जन्मों के अभ्यास के बाद परम सिद्धि (लक्ष्य) को प्राप्त कर लेता है।

विस्तार: सफलता रातों-रात नहीं मिलती। यह कई दिनों, महीनों और सालों के 'प्रयत्न' का परिणाम है। हर छोटी कोशिश आपको उस 'परां गति' (Ultimate Goal) के करीब ले जा रही है।

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