बन्धुरात्मात्मनस्तस्य येनात्मैवात्मना जितः ।
अनात्मनस्तु शत्रुत्वे वर्तेतात्मैव शत्रुवत् ॥ 6.6 ॥
जिसने अपने मन को जीत लिया है, उसके लिए मन सबसे अच्छा मित्र है; लेकिन जो ऐसा नहीं कर पाया, उसके लिए मन ही सबसे बड़ा शत्रु बनकर व्यवहार करता है।
[Image: A chariot where the rider (Self) has control of the horses (Mind) vs a chariot out of control]विस्तार: आपका मन एक सॉफ्टवेयर की तरह है। अगर आपने इसे 'ट्रेन' (Train) कर लिया है, तो यह आपको [Your Dream] तक ले जाएगा। अगर यह अनियंत्रित है, तो यही आपको सबसे ज्यादा परेशान करेगा।