॥ अध्याय 7, श्लोक 1 ॥

श्रीभगवानुवाच :
मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः ।
असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥ 7.1 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

श्रीभगवान बोले: हे पार्थ! मुझमें अनन्य प्रेम से आसक्त मन वाले और मेरे ही आश्रित होकर योग में लगे हुए तुम, जिस प्रकार मुझे 'सम्पूर्ण रूप' में संशयरहित जानोगे, उसे सुनो।

विस्तार: यहाँ कृष्ण 'समग्र' (Complete) ज्ञान की बात कर रहे हैं। IIT-Bombay की तैयारी में भी जब आप किसी विषय (जैसे Physics या Maths) में पूरी तरह डूब जाते हैं, तब आपको उसके 'मूल सिद्धांतों' का बोध होता है। कृष्ण कह रहे हैं—अब मैं तुम्हें वह मूल रहस्य बताऊंगा जिससे सारे संशय मिट जाएंगे।

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