दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया ।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते ॥ 7.14 ॥
कृष्ण कहते हैं: क्योंकि यह अलौकिक अर्थात अति अद्भुत त्रिगुणमयी मेरी माया बड़ी दुस्तर (पार करने में कठिन) है; परंतु जो पुरुष केवल मुझको ही निरंतर भजते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।
[Image: A stormy ocean representing Maya, and a strong ship representing Devotion (Prapatti) to Krishna, leading to the shore of liberation]आध्यात्मिक मर्म: माया भगवान की शक्ति है, इसलिए इसे खुद के दम पर जीतना असंभव है। जैसे एक छोटे बच्चे के लिए बड़ा मेला पार करना मुश्किल है, पर यदि वह पिता की उंगली थाम ले, तो सुरक्षित निकल जाता है। 'शरणागति' ही माया से बचने का एकमात्र रास्ता है।