चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनोऽर्जुन ।
आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ॥ 7.16 ॥
कृष्ण कहते हैं: हे भरतश्रेष्ठ अर्जुन! उत्तम कर्म करने वाले आर्त (दुखी), जिज्ञासु (जानने की इच्छा रखने वाले), अर्थार्थी (धन-संपत्ति चाहने वाले) और ज्ञानी—ये चार प्रकार के भक्त मेरा भजन करते हैं।
आध्यात्मिक मर्म: 1. आर्त: जो संकट में भगवान को पुकारते हैं (जैसे द्रौपदी)। 2. जिज्ञासु: जो सत्य को जानना चाहते हैं। 3. अर्थार्थी: जो सुख और वैभव मांगते हैं। 4. ज्ञानी: जो केवल ईश्वर को ही अपना लक्ष्य मानते हैं।