बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते ।
वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः ॥ 7.19 ॥
कृष्ण कहते हैं: अनेक जन्मों के अंत में तत्वज्ञान को प्राप्त हुआ ज्ञानी सब कुछ वासुदेव (परमात्मा) ही है—इस भाव से मुझे भजता है। ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।
आध्यात्मिक मर्म: यह ज्ञान की पराकाष्ठा है। जब इंसान को हर जीव, हर पत्थर और हर परिस्थिति में केवल ईश्वर दिखने लगे, तो वह 'महात्मा' बन जाता है। ऐसी अवस्था तक पहुँचना कई जन्मों की साधना का फल होता है।