अर्जुन उवाच :
किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम ।
अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ 1 ॥
अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन ।
प्रयाणकाले च कथं ज्ञेयोऽसि नियतात्मभिः ॥ 2 ॥
अर्जुन ने पूछा: हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत किसे कहा गया है और अधिदैव किसे कहते हैं? हे मधुसूदन! यहाँ इस शरीर में अधियज्ञ कौन है और वह कैसे है? और युक्त चित्त वाले पुरुषों द्वारा अंत समय (मृत्यु) में आप कैसे जाने जाते हैं?
आध्यात्मिक मर्म: अर्जुन यहाँ एक जिज्ञासु शिष्य की तरह उन गहरे रहस्यों को पूछ रहे हैं जो जीवन और मृत्यु के चक्र से जुड़े हैं। ये सात प्रश्न पूरे आठवें अध्याय का आधार हैं।