पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः ।
वेद्यं पवित्रमोंकार ऋक्साम यजुरेव च ॥ 9.17 ॥
कृष्ण कहते हैं: इस संपूर्ण जगत का धाता (धारण करने वाला), पिता, माता और पितामह (दादा) मैं ही हूँ। जानने योग्य पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: भगवान केवल एक दूर बैठा हुआ 'क्रिएटर' नहीं है, बल्कि वह हमारा सबसे नजदीकी संबंधी भी है। वे ही ज्ञान के स्रोत (वेद) हैं और उस ज्ञान का सार (ॐ) भी हैं। यह श्लोक हमें हर रिश्ते और हर शब्द में परमात्मा को देखने की प्रेरणा देता है।