॥ अध्याय 9, श्लोक 25 ॥

यान्ति देवव्रता देवान्पितृन्यान्ति पितृव्रताः ।
भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम् ॥ 9.25 ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं; और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं।

आध्यात्मिक मर्म: यह जीवन का निवेश (Investment) नियम है। आप अपना समय और ऊर्जा जहाँ लगाएंगे, वहीं पहुँचेंगे। यदि आपका ध्यान सर्वोच्च लक्ष्य (परमात्मा या आपके संदर्भ में IIT-Bombay जैसी श्रेष्ठ उपलब्धि) पर है, तो परिणाम भी वैसा ही महान होगा।

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