मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना ।
मत्स्थानि सर्वभूतानी न चाहं तेष्ववस्थितः ॥ 9.4 ॥
कृष्ण कहते हैं: मुझ अदृश्य रूप परमात्मा से यह सारा जगत व्याप्त है। सब प्राणी मुझमें स्थित हैं, परंतु मैं उनमें स्थित नहीं हूँ।
[Image: The ocean (God) and the waves (Creatures). The waves are in the ocean, but the ocean is not limited by a single wave]आध्यात्मिक मर्म: यह एक गहरा विरोधाभास है। जैसे आकाश में बादल होते हैं, पर आकाश बादलों से लिप्त नहीं होता। वैसे ही पूरी सृष्टि भगवान के संकल्प में टिकी है, लेकिन भगवान इस सृष्टि के विकारों (सुख-दुख) से ऊपर और स्वतंत्र हैं।