॥ श्लोक 1 ॥

अर्जुन उवाच ।
मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसंज्ञितम् ।
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥

धार्मिक व्याख्या

अर्जुन बोले: मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने जो परम गोपनीय 'अध्यात्म' विषयक वचन कहे हैं, उससे मेरा यह अज्ञान (मोह) नष्ट हो गया है।

आध्यात्मिक मर्म: अर्जुन स्वीकार करते हैं कि कृष्ण की वाणी ने उनके मन के भ्रम को दूर कर दिया है। जब जीव को गुरु या ईश्वर से सत्य का ज्ञान मिलता है, तो मोह का अंधकार स्वतः समाप्त हो जाता है।

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