अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् ।
अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥
संजय उस दृश्य का वर्णन करते हैं: अर्जुन ने उस विश्वरूप में अनेक मुख और अनेक नेत्र देखे। वह अनेक अद्भुत दर्शनों वाला, अनेक दिव्य आभूषणों से सजा हुआ और अनेक दिव्य शस्त्रों को उठाए हुए था।
आध्यात्मिक मर्म: यह भगवान की अनंतता का चित्रण है। उनके मुख और नेत्र हर दिशा में हैं, जिसका अर्थ है कि वे सब कुछ देख रहे हैं और हर जीव की पुकार सुन रहे हैं। उनके शस्त्र अधर्म के विनाश और धर्म की रक्षा के प्रतीक हैं।