दिव्यमाल्याम्बरधरं दिव्यगन्धानुलेपनम् ।
सर्वाश्चर्यमयं देवमनन्तं विश्वतोमुखम् ॥
वह विश्वरूप दिव्य मालाओं और वस्त्रों को धारण किए हुए था, उस पर दिव्य गंधों (सुगंध) का लेप लगा था। वह सब प्रकार के आश्चर्यों से भरपूर, प्रकाशमय, सीमाहीन और सब ओर मुख वाला था।
आध्यात्मिक मर्म: भगवान का रूप केवल शक्तिशाली ही नहीं, बल्कि परम सुंदर और सुगंधित भी है। 'विश्वतोमुखम्' का अर्थ है कि उनकी सत्ता हर जगह व्याप्त है, कोई भी कोना उनसे अछूता नहीं है।