॥ श्लोक 18 ॥

त्वमक्षरं परमं वेदितव्यं त्वमस्य विश्वस्य परं निधानम् ।
त्वमव्ययः शाश्वतधर्मगोप्ता सनातनस्त्वं पुरुषो मतो मे ॥

धार्मिक व्याख्या

आप ही जानने योग्य परम अक्षर (विनाशरहित) तत्व हैं। आप ही इस संसार के परम आधार हैं। आप अविनाशी हैं, शाश्वत धर्म के रक्षक हैं और आप ही सनातन पुरुष हैं—ऐसा मेरा मत है।

आध्यात्मिक मर्म: अर्जुन अब इस निष्कर्ष पर पहुँच गए हैं कि कृष्ण ही वह अंतिम सत्य हैं जिसकी खोज ऋषि-मुनि करते हैं। वे ही धर्म की मर्यादा बनाए रखते हैं।

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