अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्यमनन्तबाहुं शशिसूर्यनेत्रम् ।
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ॥
मैं आपको आदि, मध्य और अंत से रहित, अनंत शक्ति वाले और अनंत भुजाओं वाले देख रहा हूँ। सूर्य और चंद्रमा आपकी आँखें हैं। धधकती हुई अग्नि आपके मुख के समान है और आप अपने तेज से इस विश्व को तपा रहे हैं।
आध्यात्मिक मर्म: सूर्य और चंद्रमा को ईश्वर की आँखें बताया गया है, जो दिन और रात के साक्षी हैं। भगवान की शक्ति सृजन भी करती है और तपाकर शुद्ध भी करती है।