॥ श्लोक 26 ॥

अमी च त्वां धृतराष्ट्रस्य पुत्राः सर्वे सहैवावनिपालसङ्घैः ।
भीष्मो द्रोणः सूतपुत्रस्तथासौ सहास्मदीयैरपि योधमुख्यैः ॥

धार्मिक व्याख्या

वे धृतराष्ट्र के सभी पुत्र राजाओं के समूहों सहित और भीष्म, द्रोण तथा वह कर्ण भी—हमारे पक्ष के मुख्य योद्धाओं के साथ आपके मुख में प्रवेश कर रहे हैं।

आध्यात्मिक मर्म: यहाँ अर्जुन भविष्य को वर्तमान में देख रहे हैं। उन्हें दिखाई दे रहा है कि युद्ध का परिणाम क्या होने वाला है। जो योद्धा उन्हें अपराजेय लग रहे थे, वे भी काल के मुख में समा रहे हैं।

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