लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ताल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः ।
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भासस्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥
आप उन संपूर्ण लोकों को प्रज्वलित मुखों द्वारा ग्रास करते हुए सब ओर से चाट रहे हैं। हे विष्णो! आपका उग्र प्रकाश अपने तेज से पूरे जगत को पूर्ण करके सबको तपा रहा है।
विस्तृत व्याख्या: अर्जुन अब भगवान के 'संहारकारी' रूप को देख रहे हैं। यहाँ भगवान को 'विष्णु' कहकर संबोधित किया गया है, जो सर्वव्यापक हैं। अर्जुन कह रहे हैं कि आपका तेज इतना प्रचंड है कि वह न केवल शत्रुओं को नष्ट कर रहा है, बल्कि पूरे ब्रह्मांड को अपनी लपटों से झुलसा रहा है। यह ईश्वर की वह शक्ति है जो पुराने और जर्जर हो चुके अधर्म को मिटाकर नई रचना का मार्ग प्रशस्त करती है।