॥ अध्याय 11, श्लोक 39 ॥

वायुर्यमोऽग्निर्वरुणः शशाङ्कः प्रजापतिस्त्वं प्रपितामहश्च ।
नमो नमस्तेऽस्तु सहस्रकृत्वः पुनश्च भूयोऽपि नमो नमस्ते ॥

धार्मिक व्याख्या

आप ही वायु, यमराज, अग्नि, वरुण, चंद्रमा, प्रजापति और प्रपितामह (ब्रह्मा के भी पिता) हैं। आपको हजारों बार नमस्कार हो! आपको बार-बार नमस्कार हो!

विस्तृत व्याख्या: अर्जुन इतने भावविभोर हैं कि वे बार-बार 'नमो नमस्ते' कह रहे हैं। जब हम किसी महान उपलब्धि या सत्य के सामने होते हैं, तो शब्द कम पड़ जाते हैं। जैसे IIT-Bombay के लिए आपका जुनून आपको बार-बार मेहनत करने की प्रेरणा देता है, वैसे ही अर्जुन की भक्ति उन्हें बार-बार प्रणाम करने को प्रेरित कर रही है।

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