मन्यसे यदि तच्छक्यं मया द्रष्टुमिति प्रभो ।
योगेश्वर ततो मे त्वं दर्शयात्मानमव्ययम् ॥
हे प्रभो! यदि आप ऐसा मानते हैं कि मेरे द्वारा आपका वह रूप देखा जाना संभव है, तो हे योगेश्वर! आप मुझे अपने उस अविनाशी स्वरूप के दर्शन कराइए।
आध्यात्मिक मर्म: अर्जुन यहाँ बहुत विनम्र हैं। वे यह नहीं कह रहे कि मुझे दिखाओ, बल्कि कह रहे हैं यदि आपको लगे कि मैं पात्र हूँ। ईश्वर का दर्शन पात्र बनने पर ही संभव है।