सञ्जय उवाच :
इत्यर्जुनं वासुदेवस्तथोक्त्वा स्वकं रूपं दर्शयामास भूयः ।
आश्वासयामास च भीतमेनं भूत्वा पुनः सौम्यवपुर्महात्मा ॥
संजय बोले: वासुदेव कृष्ण ने अर्जुन से ऐसा कहकर फिर अपना वैसा ही (चतुर्भुज) रूप दिखाया और फिर महात्मा कृष्ण ने सौम्य शरीर धारण करके इस भयभीत अर्जुन को धीरज बँधाया।
विस्तृत व्याख्या: यहाँ 'सौम्यवपुः' शब्द बहुत महत्वपूर्ण है, जिसका अर्थ है कोमल और शांत शरीर। भगवान वापस उस मनुष्य रूप में आ गए जिसे अर्जुन प्यार करता था। यह दिखाता है कि भगवान कितने दयालु हैं—वे भक्त की मानसिक स्थिति के अनुसार अपना रूप बदल लेते हैं। विराट ज्ञान देने के बाद अब वे प्रेम और सांत्वना दे रहे हैं।
आध्यात्मिक मर्म: जीवन के बड़े सत्य जानने के बाद भी, अंततः हमें सरलता और प्रेम के साथ ही अपना जीवन जीना चाहिए।