पश्यादित्यान्वसून्पुद्रानश्विनौ मरुतस्तथा ।
बहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ॥
कृष्ण कहते हैं: हे भरतवंशी अर्जुन! मुझमें आदित्यों को, वसुओं को, रुद्रों को, अश्विनीकुमारों को और मरुतों को देख। ऐसे अनेक आश्चर्यजनक रूपों को देख, जिन्हें पहले किसी ने नहीं देखा।
आध्यात्मिक मर्म: भगवान अर्जुन को वह सब दिखा रहे हैं जो साधारण मानवीय अनुभव से परे है। वे समस्त देवताओं और ब्रह्मांड की शक्तियों को अपने एक ही विग्रह (शरीर) में समाहित दिखा रहे हैं।