॥ श्लोक 9 ॥

संजय उवाच ।
एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरि: ।
दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम् ॥

धार्मिक व्याख्या

संजय बोले: हे राजन! महायोगेश्वर भगवान ने इस प्रकार कहकर अर्जुन को अपना परम ऐश्वर्ययुक्त दिव्य स्वरूप दिखाया।

आध्यात्मिक मर्म: यहाँ संजय धृतराष्ट्र को बता रहे हैं कि कृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। 'महायोगेश्वर' शब्द यह दर्शाता है कि कृष्ण सभी योग शक्तियों के स्वामी हैं और उनकी इच्छा मात्र से ब्रह्मांड प्रकट और ओझल हो सकता है।

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