ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना ।
अन्ये साङ्ख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे ॥ 13.24 ॥
उस परमात्मा को कुछ लोग शुद्ध हुई सूक्ष्म बुद्धि से ध्यान के द्वारा हृदय में देखते हैं, अन्य लोग सांख्य योग (ज्ञान योग) के द्वारा और कुछ अन्य कर्म योग के द्वारा देखते हैं।
विस्तृत व्याख्या: यहाँ भगवान ईश्वर प्राप्ति के विभिन्न मार्गों की पुष्टि कर रहे हैं। 1. ध्यान योग: एकाग्रता और समाधि द्वारा। 2. सांख्य योग: जड़ और चेतन के विवेक द्वारा सत्य को समझना। 3. कर्म योग: निस्वार्थ भाव से कर्म करके चित्त शुद्ध करना। भगवान कहते हैं कि मार्ग अलग हो सकते हैं, लेकिन सबका लक्ष्य उसी एक आत्म-तत्व का साक्षात्कार करना है।