न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः ।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम ॥ 15.6 ॥
उस परम पद को न सूर्य प्रकाशित कर सकता है, न चंद्रमा और न अग्नि। जहाँ पहुँचकर मनुष्य फिर लौटकर संसार में नहीं आते, वही मेरा परम धाम है।
विस्तृत व्याख्या: यह श्लोक बहुत प्रसिद्ध है। भगवान का धाम किसी भौतिक प्रकाश पर निर्भर नहीं है; वह स्वयं प्रकाशमान (Self-luminous) है। भौतिक जगत में हमें चीजें देखने के लिए सूर्य या बिजली की ज़रूरत होती है, लेकिन आत्म-साक्षात्कार की उस स्थिति में चेतना का अपना ही प्रकाश होता है। यह वह परम गंतव्य है जहाँ से दुखों के इस संसार में वापसी नहीं होती।