चिन्तामपरिमेयां च प्रलयान्तामुपाश्रिताः ।
कामोपभोगपरमा एतावदिति निश्चिताः ॥
आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः ।
ईहन्ते कामभोगार्थमन्यायेनार्थसञ्चयान् ॥
वे मृत्यु के समय तक रहने वाली अनगिनत चिंताओं के आश्रय में रहते हैं। विषयों का भोग भोगना ही उनके लिए परम पुरुषार्थ है—ऐसा वे निश्चय किए रहते हैं। वे सैकड़ों आशाओं की फाँसियों से बँधे हुए, काम-क्रोध के परायण होकर विषय-भोगों के लिए अन्यायपूर्वक धन बटोरने की चेष्टा करते हैं।
विस्तृत व्याख्या: यहाँ मानसिक तनाव (Stress) का मूल कारण बताया गया है। जब व्यक्ति केवल भौतिक सुखों को ही जीवन का लक्ष्य मान लेता है, तो उसे खोने का डर और पाने की हवस उसे कभी चैन से बैठने नहीं देती। वह धन कमाने के लिए नैतिकता और न्याय को भी छोड़ देता है।