न च तस्मान्मनुष्येषु कश्चिन्मे प्रियकृत्तमः ।
भविता न च मे तस्मादन्यः प्रियतरो भुवि ॥ 18.69 ॥
भावार्थ: मनुष्यों में उससे बढ़कर मेरा कोई प्रिय कार्य करने वाला नहीं है और न ही इस पृथ्वी पर उससे बढ़कर मेरा कोई दूसरा अत्यंत प्रिय होगा।
विस्तृत व्याख्या: यहाँ भगवान उस व्यक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं जो गीता का प्रचार करता है। भगवान कहते हैं कि जो मेरे इस उपदेश को लोगों तक ले जाता है, वह मेरा 'सबसे प्रिय' (Favoured one) है। यह ईश्वर की ओर से मिलने वाला सबसे बड़ा सम्मान है।